"नाहिया मुक़द्दसा" का अर्थ है "पवित्र क्षेत्र"। शिया विद्वानों के अनुसार, यह ज़ियारत इमाम महदी (अ.त.फ़.श.) ने अपने विशेष नायबों (Deputies) में से एक के माध्यम से हमें पहुँचाई है। इसमें इमाम हुसैन (अ.स.) की शहादत और उस दौरान उनके परिवार पर हुए ज़ुल्मों का ऐसा वर्णन है जो सुनने और पढ़ने वाले की आँखों में आँसू ला देता है।
ज़ियारत-ए-नहिया का इतिहास और अर्थ अर्थ: ziyarat e nahiya in hindi
यह ज़ियारत हमारे आख़िरी इमाम, इमाम-ए-ज़माना (इमाम महदी अ.ज.) की तरफ़ से मनसूब (जुड़ी) है। इतिहासकारों के मुताबिक़, यह ज़ियारत उस वक़्त की गवाही है जब इमाम महदी (अ.ज.) ग़ैबत (अदृश्यता) की हालत में थे और ziyarat e nahiya in hindi
ज़ियारत-ए-नाहिया मुक़द्दसा (Ziyarat-e-Nahiya al-Muqaddasa) शिया इस्लाम में इमाम हुसैन (अ.स.) और कर्बला के शहीदों को याद करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण और दिल को छू लेने वाली प्रार्थनाओं में से एक है। यह ज़ियारत विशेष रूप से इमाम महदी (अ.त.फ़.श.) से संबंधित मानी जाती है, जिन्होंने इसमें कर्बला की त्रासदी का विस्तार से वर्णन किया है। ziyarat e nahiya in hindi
इसमें इमाम हुसैन की इबादत, उनके सब्र और इस्लाम की रक्षा के लिए उनके समर्पण की प्रशंसा की गई है।
यहाँ "ज़ियारत-ए-नाहिया" (Ziyarat-e-Nahiya) पर एक विस्तृत लेख हिंदी में दिया गया है। यह लेख इस ज़ियारत के महत्व, इतिहास और उसकी भावनात्मक पृष्ठभूमि को विस्तार से प्रस्तुत करता है।