यहाँ दो पहलू हैं – सकारात्मक और नकारात्मक।
पिछले कुछ वर्षों में, भारतीय साइबर सेल ने डार्क वेब के जरिए चल रहे ड्रग्स ट्रैफिकिंग रैकेट का भंडाफोड़ किया है (जैसे कि 'डार्कनेट ड्रग्स केस' मुंबई और दिल्ली में)।
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अक्सर फिल्मों और न्यूज़ में आपने शब्द सुना होगा। लोगों का मानना है कि यह केवल गुंडों और अपराधियों की दुनिया है, लेकिन क्या वाकई ऐसा है? क्या इसका कोई फायदा भी है? क्या आम इंसान वहां जा सकता है?
जिन देशों में सोशल मीडिया या न्यूज पर पाबंदी है, वहां के लोग दुनिया से जुड़ने के लिए इसका सहारा लेते हैं।
डार्क वेब और डीप वेब के बीच के तकनीकी अंतर
:
यहाँ दो पहलू हैं – सकारात्मक और नकारात्मक।
पिछले कुछ वर्षों में, भारतीय साइबर सेल ने डार्क वेब के जरिए चल रहे ड्रग्स ट्रैफिकिंग रैकेट का भंडाफोड़ किया है (जैसे कि 'डार्कनेट ड्रग्स केस' मुंबई और दिल्ली में)।
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डार्क वेब और डीप वेब के बीच के तकनीकी अंतर
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