इस अधिनियम के तहत वसूली की प्रक्रिया 'सर्टिफिकेट ऑफिसर' द्वारा संचालित की जाती है। इसमें कलेक्टर, अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) या राज्य सरकार द्वारा नियुक्त कोई भी राजपत्रित अधिकारी शामिल हो सकता है।
बिहार राज्य में यह अधिनियम बिहार ऐंड उड़ीसा पब्लिक डिमांड रिकवरी एक्ट (बिहार संशोधन) 1953 एवं 1981 संशोधन के साथ लागू है। आज भी:
हिंदी में इस अधिनियम की पीडीएफ प्राप्त करने के लिए आपको आधिकारिक स्रोतों पर निगरानी रखनी होगी। बहुत सी निजी वेबसाइटें पुरानी या गलत प्रति दे सकती हैं, इसलिए हमेशा को प्राथमिकता दें।
(आपका नाम / कानूनी लेखक) अंतिम अद्यतन: सितंबर 2025 (नवीनतम संशोधनों के लिए सरकारी अधिसूचना देखें)
यह अधिनियम सरकारी बकाया वसूलने के लिए 'सर्टिफिकेट ऑफिसर' (Certificate Officer) को विशेष अधिकार देता है:
बिहार और ओडिशा सार्वजनिक मांग वसूली अधिनियम 1914 का महत्व निम्नलिखित है:
(ध्यान दें: साधारण दीवानी अदालत इस मामले में हस्तक्षेप नहीं कर सकती। केवल उच्च न्यायालय रिट याचिका ले सकता है।)